श्रीमद्भागवतमाहापुराण: द्वितीय स्कंध: पहला अध्याय- पृष्ठ 3

।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।। ध्यान-विधि और भगवान के विराट स्वरुप का वर्णन: पृष्ठ 3 यस्यां सन्धार्यमाणायां योगिनो भक्तिलक्षणः। आशु सम्पद्यते योग आश्रयं भद्रमीक्षतः॥21॥ धारणा स्थिर हो जाने पर ध्यान मे जब योगी अपने परम मङ्गलमय आश्रय (भगवान) को देखता है, तब उसे तुरन्त ही भक्ति-योग की प्राप्ति हो जाती है॥21॥ Continued Reading …

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श्रीमद्भगवद्गीता

The Geeta is set in a narrative framework of a dialogue between Pandava prince Arjuna and his guide and charioteer Lord Krishna. Facing the duty as a warrior to fight the Dharma Yudhha or righteous war between Pandavas and Kauravas, Arjuna is counselled by Lord Krishna to ........

श्रीशिवमहापुराण-विद्येश्वरसंहिता: तेरहवाँ अध्याय p-7

सदाचार, शौचाचार, स्नान, भस्मधारण, संध्या-वंदन, प्रणव-जप, गायत्री-जप, दान, न्यायतः धनोपार्जन तथा अग्निहोत्र आदि की विधि एवं महिमा का वर्णन : पृष्ठ 7

श्री राम चरित मानस

श्री राम चरित मानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित एक महाकाव्य है। श्री रामचरित मानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है।